"नियति की गतिकोई ना जाने;चाहे लोग समझेंअपने को कितने भी सयाने,कर्म का लेख उजागर ही होगा,चाहे तू माने या चाहे ना माने"
"नियति की गतिकोई ना जाने;
चाहे लोग समझेंअपने को कितने भी सयाने,
कर्म का लेख उजागर ही होगा,चाहे तू माने या चाहे ना माने"