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महंगाई

महंगाई, महंगाई, महंगाई

लागत बा ई ससुरी कब्बो ना जाई

सुबह - शाम नून - तेल की जोगाड़ में

निकलत बा खटाई, महंगाई..महंगाई..महंगाई

खादी वाला नेता लूटलें; 

चमचा और चेलन में बटलें, 

हमरा नईखे बुझात ई देशवा कवना ओरे जाई; 

महंगाई, महंगाई, महंगाई

लिखल पढल सब फेल हो गई ल

रोजी र

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