गांव

कहते हैं भारत गांव में बसता है

शब्द ही काफी हैं 

हां भारत गांव में ही बसता है

आदमी के सुख दुख का पता गांव में ही चलता है

किसी के घर शादी ब्याह हो या कुछ और प्रयोजन, 

सब मिल के है हाथ बंटाते चाहे रमई हो या सुद्दोधन

कोई किसी से दुराव नहीं रखता

छोटे हो या बड़े काम सब हैं साथ करते

छपपर हो बनाना या मण्डप हो सजाना

शरबत, भूजा खा के है लोग जुट जाते

कहें सतीश अगर विपत्ति किसी पर पड़ जाए, सारे गांव वाले उसके लिए अपनी सम्पत्ति उठा लाते"