अय मेरे प्यारे वतन
ये तेरे ज़ाति धरम
इनसे दिल हैरान
खोई खोई ज़िन्दगी
सोई सोई बंदगी
इनसे दिल हैरान

मज़हबी खंज़र लिए
करते हैं ये क़त्ले-आम
उठती आवाज़ों को ये
करते हैं पल में तमाम
हैं यही नेता तेरे
है यही इनका ईमान
इनसे दिल हैरान

 

तेरे दामन में हैं आज
तेरे बच्चों का लहू
हर तरफ़ लुटने लगी
बेटियों  की आबरू
हैं यही बच्चे तेरे
इंसानियत भूले जो आज
इनसे दिल हैरान

सतेन्द्र मनम