जिंदगी के इस संघर्ष में मैं अकेला था
न ही कोई आगे, न ही कोई पीछे
जब-जब मैं हारा, जब-जब मैं थका,
दुनिया ने जब-जब मुझ पर हँसा,
दूर खड़े मेरा हौसला बढ़ाते,
कभी कभी हल्की डाँट भी लगाते
वो थे "मेरे पापा"
मेरी हर ख्वाहिश हँस कर पूरी करते
सब कुछ सहते पर कभी किसी से कुछ न कहते
मेरी गलती पर मुझको समझाते
कभी-कभी वो गले लगाते
सब तो अपना प्यार जताते,वो मेरे सो जाने पर मेरा सर सहलाते
कभी कुछ न कहते पर सब जानते
पूरे घर में सबसे ज्यादा मुझको मानते
कभी कहते नही थे आप लेकिन मैं जान गया हूँ,
"पापा" आपकी कीमत मैं पहचान गया हूँ
इस दुनिया में मैं कुछ भी नही हमेशा जाना जाऊंगा आपके नाम से
लेकिन एक दिन आप भी गर्व से चलोगे जब चंद लोग पहचानेंगे मेरे काम से।।