सरहदों का किनारा हो, मां भारतीय का नारा हो
वीर तुम बढ़े चलो, अहल-ए-वतन हमारा हो
रक्त में उबाल हो, हाथों में इक मिशाल हो
वतन पे जां निसार हो, हर दिल से ये पुकार हो
हर तरफ ये शोर हो, चाहे अंधेरा घनघोर हो
चलते हैं सीना तान के, ये सरहदों पे शान से
चाहे कोई आपदा हो, या हो युद्ध का विषय
वीर माता भारतीय के, सीना ताने हर समय
ठंड हो या धूप हो, हर दिशा में कूज हो
वीर माता भारतीय, के हर दिशा में गूंज हो
वीरों की ये मातृभूमि, वीरों की ये कर्मभूमि
यही हमारी जन्मभूमि,यही हमारी जन्मभूमि।
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सर्वेश पाण्डेय


