घनघोर अंधेरा छा जाए, पर जुगनू कब घबराता है
अपने अंतस की उर्जा से,जग ज्योतिर्मय कर जाता है
आफत आंधी,बाधा बदली,भय भूधर भी बन जाए तो
स्वासों की अग्नि जला योगी, दीपक सा जलता जाता है।


घनघोर अंधेरा छा जाए, पर जुगनू कब घबराता है
अपने अंतस की उर्जा से,जग ज्योतिर्मय कर जाता है
आफत आंधी,बाधा बदली,भय भूधर भी बन जाए तो
स्वासों की अग्नि जला योगी, दीपक सा जलता जाता है।