Article 1 min read 213.8K reads

ख्वाब


आंखों में खुवाईशो का समन्दर लिए ख्वाब ओढ़कर बैठी थी इक रात,करवटों में उम्र ढल गई हो जैसे ज़िन्दगी हो कोई अधूरी बात।

Read more Earn more Learn more