कोई छोटा और कोई बड़ा नहीं होता इस जमीं के बगैर इस दुनिया में कुछ भी खड़ा नहीं होता नजर उठाकर देखो तो कितनी ही रियासतें खंडहर पड़ी है यहां इन्सानियत से यहां कुछ भी बड़ा नहीं होता।