
तुम्हे........
मैं जो कभी......
न मिलूं तो गम न करना माना,
तुमको अज़ीयत होगी तुमसे रुबरु मेरी हकीक़त होगी
ये जिस्म जो फ़ानी है
बे-मुरव्वत ज़िन्दगी की नामुराद कहानी है तब .......
तुम्हे .........
मैं उन्ही किताबों में मिलूंगी जहाँ......
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