फूल चुनते हुए अम्मा गा रही हैं गीत,
नैहर गए तो बरस बीते राजा
पिया गए बीते दिन बीस,
बचपन बीते उमर गयी रनिया
सखियन को संग तीस,
और इसी गीत के साथ
घुल गयी हवा में एक खुशबू,
जो महसूस हो रही है,
मैं उसे जी रहा हूँ
अम्मा के फूल चुनते हुए
हर सुबह, अकेले, खिड़की पर सिर टिकाये।।
अंकित

