आदमी तारीफ़ कर रहे हैं औरतों की
औरतें तारीफ़ कर रही हैं आदमियों की
हर आदमी के अंदर एक औरत है
और हर औरत के अंदर एक आदमी
औरतें, औरतों की तारीफ़ कर रही हैं
आदमी, आदमियों की,
यह स्वप्न नहीं, जागता हुआ सच है,
कुछ औरतें और आदमी जागे हुए हैं।।
अंकित


आदमी तारीफ़ कर रहे हैं औरतों की
औरतें तारीफ़ कर रही हैं आदमियों की
हर आदमी के अंदर एक औरत है
और हर औरत के अंदर एक आदमी
औरतें, औरतों की तारीफ़ कर रही हैं
आदमी, आदमियों की,
यह स्वप्न नहीं, जागता हुआ सच है,
कुछ औरतें और आदमी जागे हुए हैं।।
अंकित