बुलंदियाँ छू जाए कोई,

तो लोग वाह करते है।

शायरी लिख डाले कोई

तो लोग ‘वाहकरते है।

क्यों ना इस बासी

सी हुई ज़िंदगी को 

ताज़ा शायरी करदे,

बुलंदियों छू जाए,

फिर हम सब ही मिलके 

वाह वाह करते है....


डा सरिता डांगी✍️✍️✍️