1)कई बार चाहा तेरी आँखों में पढ़ूँपर सवालों की धुँध कुछ ज़्यादा ही थी।2)आज फिर रोज़ की तरह रात हुई।ख़्वाबों में ही उनसे बातें, मुलाक़ात हुई।———————-—~डा सरिता डांगी✍️✍️
1)कई बार चाहा तेरी आँखों में पढ़ूँपर सवालों की धुँध कुछ ज़्यादा ही थी।
2)आज फिर रोज़ की तरह रात हुई।ख़्वाबों में ही उनसे बातें, मुलाक़ात हुई।
———————-—~डा सरिता डांगी✍️✍️