
परिंदों की दुनिया में
कभी झाँक के देखा है?
झाँक लेना कभी,
शाम होने से पहले।
तिल-तिल करके
घर बनाते है वो,
सोचना दस बार,
उन्हें किसी शाख़ पर से
उड़ाने से पहले।
तिनके तिनके,
डाली पर निर्भर है वो,
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परिंदों की दुनिया में
कभी झाँक के देखा है?
झाँक लेना कभी,
शाम होने से पहले।
तिल-तिल करके
घर बनाते है वो,
सोचना दस बार,
उन्हें किसी शाख़ पर से
उड़ाने से पहले।
तिनके तिनके,
डाली पर निर्भर है वो,