दुनिया इतनी बुरी नहीं है,

जितनी माया जाल है।

फँस रहे है इसमें सब 

लोगों का बुरा हाल है।

धैर्य नहीं है,धीरज भी नहीं,

करते बहुत सवाल है।

ज़िंदा है, पर ख़ुश नहीं है

भोतिक सुख से कुछ वंचित है

बस, उससे मन बेहाल है।

दुनिया इतनी बुरी नही

जितनी माया जाल है।


डा सरिता डांगी✍️✍️✍️