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हम पर भी कभी
कोई नज़्म लिखी होती…
हमको भी कभी
हुस्न कहा होता…
हमको भी कभी
“सरिता”ना कहके
हमको भी कभी
प्यास कहा होता…
हमको भी कभी
जिज्ञासा देते
हमको भी अपनी
आस कहा होता….
हमको भी कभी
सुन लिया होता
हम पर भी कभी
विश्वास किया होता …
हम पर भी कभी
कोई …नज़्म कही होती
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~सरिता~

