ख़ता आज मुझसेबस इतनी हुईकि ख़तों को उसके खाते के,जला के आयी हूँ।दबाई नही सिर्फ़कुछ हसरतें अपनी,आख़िरी निशानी भी उसकीआज दबा के आयी हूँ।—————डा सरिता डांगी✍️✍️
ख़ता आज मुझसेबस इतनी हुईकि ख़तों को उसके खाते के,जला के आयी हूँ।दबाई नही सिर्फ़कुछ हसरतें अपनी,आख़िरी निशानी भी उसकीआज दबा के आयी हूँ।
—————डा सरिता डांगी✍️✍️