इश्क़ करने की सज़ा

इतनी बेरहम भी ना हो.

कि जुबाँ ख़ामोश हो जाये

और अल्फ़ाज़,गुमशुदा हो जाए


इश्क़ इतना भी ना हो

कि रात.... दिन लगने लगे

और दिन... काली रात हो जाए


इश्क़ इतना भी ना हो…

कि आशिक़ी इबादत लगे

और आशिक देखते-देखते

ख़ुदा हो जाये


~ सरिता डांगी ~