गुनाहों के अगर,पैमाने होतेकिसी भी शख़्स के,वो फिरख़ाली नहीं होते।गहराइयाँ डूबनेकी अगर,किसी के दिलतक ही होतीआज कुछदुश्मन भी फिरहमारे होते।———————-डा सरिता डांगी✍️✍️