गुनाहों के अगर,
पैमाने होते
किसी भी शख़्स के,
वो फिर
ख़ाली नहीं होते।
गहराइयाँ डूबने
की अगर,
किसी के दिल
तक ही होती
आज कुछ
दुश्मन भी फिर
हमारे होते।
———————-
डा सरिता डांगी✍️✍️
———————-


गुनाहों के अगर,
पैमाने होते
किसी भी शख़्स के,
वो फिर
ख़ाली नहीं होते।
गहराइयाँ डूबने
की अगर,
किसी के दिल
तक ही होती
आज कुछ
दुश्मन भी फिर
हमारे होते।
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डा सरिता डांगी✍️✍️
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