आज भी चाँदरोज़ सा निकलापर रूह को मेरीछू कर निकला।बिखेरी नही सिर्फ़चाँदनी मुझ परबल्कि मुझे अपनेआग़ोश मेंले के निकाला।आज भी चाँदरोज़ सा निकला।