जबांज देश के
सलाम उन जाबाजों को
जो देवदूत बनकर आते हैं
आपदाओं से जूझ रहे जन-जन के
प्राणरक्षक बन जाते हैं
ऐसा नहीं के लौह पुरुष हैं
ऐसा नही कोई चमत्कारी
इंसानियत का जज़्बा है दिल में
मानवता का धर्म जहाँ
फर्ज है कर्तव्य है फिर भी
मानव धर्म निभाते हैं
कंधे को आधार बनाकर
बाजुओं को ढाल बनाकर
बेसहारों,के लिए यह
अवलंब बन जाते हैं
जहाँ मौत सामने खड़ा हो
वहाँ अचानक जीवन रक्षक बन
यह अविलंब पहुँच जाते हैं
साहस हिम्मत का अदम्य परिचय
यह जांबाज दे जाते हैं
नाज है इस देश का इनपर
सदा रहना अविचल तुम पथ पर
हे कर्मठ हे धर्मवीर
नत मस्तक हमदर्द तुम्हें है
हे भारत के वीर सपूत
सरिता प्रसाद


