हक है मुझे मै एक जनता हूँ इस भारत माता की संतान हूँ जानना है मुझे मेरे देश में क्या हो रहा है क्यों हो रहा है क्या घटित हो रहा है किसलिए हो रहा है क्या उदेश्य है इसके पीछे इसके आगे क्या हो रहा है क्या देश उत्कर्ष की ओर बढ़ रहा है या फिर विघटन की ओर कहीं खिलवाड़ तो नही हो रहा संग इसके क्यों न रहूँ विश्व के किसी कोने में जान बसता है मेरा अपने देश में हित अहित की मुझे चिंता है जानना है मुझे क्योंकि मैं एक जागरूक जनता हूँ  हक है मुझे मै एक जनता हूँ इस भारत माता की संतान हूँ बागडोर सौंप दिया है जिसके हाथ में क्या वो विश्वास के लायक है कहीं लूट तो नही रहा देश को मेरा यह सब मुझे जानना है हक है मुझे मै एक जनता हूँ इस भारत माता की संतान हूँ क्या पीस रही है जनता मनमाने शासन से या फिर खुश है प्रसन्न है क्या देशहित प्लानिंग हो रहा है या फिर अपनी ही बसाई जा रही है क्या जनता के धन का सदुपयोग हो रहा है या फिर अपना बटुआ गरम हो रहा है जानना है मुझे क्योंकि हक है मुझे मै एक जनता हूँ इस भारत माता की संतान हूँ जातिवाद के दांव पेंच से कहीं भावनाओं से खेला तो नही जा रहा है सांप्रदायिकता के आग में  कहीं हाथ सेंका तो नही जा रहा है कहीं पीस तो नही रही जनता कुर्सी की राजनीति में जानना है मुझे क्योंकि हक है मुझे मै एक जनता हूँ इस भारत माता की संतान हूँ क्या सुरक्षित है हमारी बच्चियाँ उनकी इज्जत से खेला तो नही जा रहा है क्या भूत वर्तमान सुरक्षित है देश का सीमाएं सुरक्षित है देश का या फिर आतंकी घुसपैठ हो रहा है    क्या सबकुछ सही हो रहा है या फिर कुछ गलत हो रहा है जानना है मुझे क्योंकि हक है मुझे मै एक जनता हूँ इस भारत माता की संतान हूँ कहीं राजनीति दांव पेंचों तले मेरा देश पिस तो नही रहा है क्या भ्रष्टाचार पैर फैला रहा है या बेरोजगारी घर कर रही है या महंगाई कमर तोड़ रही है कहीं अन्नदाता पिस तो नही रहे कर्ज के बोझ तले क्यों बार – बार आत्महत्याएँ हो रही है जानना है मुझे क्योंकि हक है मुझे मै एक जनता हूँ इस भारत माता की संतान हूँ क्या चुप तो नहीं है जनता कहीं इनका शोषण तो नही हो रहा है महापुरुषों के बलिदानों पश्चात पाया है हमने अपने देश को कितनी ही उतार – चढ़ाव झेला है इसने खो दिया था इसने अपने अस्तित्व को बड़े ही जद्दोजहद से पाया है कहीं ऐसा तो नहीं फिर से आ रहे हों वही दिन वापस जानना है मुझे क्योंकि हक है मुझे मै एक जनता हूँ इस भारत माता की संतान हूँ नहीं देख सकता मजबूर अपने भारत को नहीं देख सकता जंजीरों मे जकड़ा हुआ अपने देश को खुशहाल देखना चाहता हूँ नहीं देख सकता आँसू माँ भारती के आँखों में नहीं देख सकता बिलखती हुई जनता को नहीं देख सकता फिर से गुलाम होता देश को सोच – सोच मेरा दिल घबड़ा रहा है सोच – सोच इन बातों को परेशान हो रहा हूँ जानना है मुझे क्योंकि हक है मुझे मै एक जनता हूँ इस भारत माता की संतान हूँ