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आश की डोर

अपनी – अपनी जीत का सभी

गुणगान कर रहे हैं

कल क्या होगा

क्या न होगा

संभव क्या होगा

असंभव क्या होगा

फिर भी अपनी कथा सुना रहे हैं

अपनी – अपनी जीत का सभी

गुणगान गा रहे हैं

मन असंभव के घेरे में पड़ा है

प्रतिस्पर्धाएँ जबरदस्त है

सभी खड़े हैं कतार मेँ

उम्मीदों की डोर से बंधे

सभी एक ही सुर मेँ

गुणगान कर रहे हैं

अपनी - अपनी जीत का सभी

गुणगान गा रहे हैं

हम होगें कामयाब

हम होगें कामयाब

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