अपनी – अपनी जीत का सभी
गुणगान कर रहे हैं
कल क्या होगा
क्या न होगा
संभव क्या होगा
असंभव क्या होगा
फिर भी अपनी कथा सुना रहे हैं
अपनी – अपनी जीत का सभी
गुणगान गा रहे हैं
मन असंभव के घेरे में पड़ा है
प्रतिस्पर्धाएँ जबरदस्त है
सभी खड़े हैं कतार मेँ
उम्मीदों की डोर से बंधे
सभी एक ही सुर मेँ
गुणगान कर रहे हैं
अपनी - अपनी जीत का सभी
गुणगान गा रहे हैं
हम होगें कामयाब
हम होगें कामयाब
के गीत सभी को सुना रहे हैं
कहते हैं कई बार
जैसा सोचो वैसा होता है
सकारात्मक सोचो
सकारात्मक होता है
नकारात्मक सोचो
नकारात्मक होता है
शायद इसी उम्मीद पर सभी
दिल मेँ आशा जगा रहे हैं
अपनी – अपनी जीत का सभी
गुणगान गा रहे हैं
कहीं गुलामी की जंजीर न जकड़ ले
भय हर पल सता रहा है
सफलता संदेहास्पद है हर पक्षों मेँ
विजेता तो कोई एक ही होगा
कार्यकर्ताओं के मनोबल बढ़ाने हेतू
कविता सुना रहे हैं
अपनी – अपनी जीत का सभी
गुणगान गा रहे हैं


