माँ सुन ले मेरी पुकार ! माँ माँतू सुन ले मेरी पुकार , तेरा प्यार हूँ  मैं , मैं हूँ तेरा दुलार , मुझे भी दुनिया  में आने दे ना  माँ , बहुत कुछ करके दिखाने दे ना  माँ !   माँ मैं तुझसे अपार प्यार करुँगी , कुल का रोशन नाम करुँगी , सब गुण अंगीकार करुँगी; हर स्थिति को स्वीकार  करुँगी, गर्व से सर ऊँचा हो तेरा , ऐसा काम बारम्बार करुँगी ,   ऐसा क्या काम है , जो मैं ना कर पाऊँगी ? मदर टेरेसा ,कल्पना व् इंदिरा बन कर दिखाऊंगी ; तेरे हर दुःख में तेरा साया बन कर , पल - पल तेरा साथ निभाऊंगी , एक नहीं , दो - दो घरों की लाज निभाऊंगी , जीवन का तेरे सहारा बन कर, बुढ़ापे की लाठी बन जाऊँगी !   मैंने भी कुछ सपने संजोए हैं माँ ! माला में सूंदर मोती पिरोये हैं माँ , इस माला को मैं पूरा बनाऊंगी , बनाकर तुम्हारे तन पर सजाऊँगी , यह माला , जिसमें मेरे नन्हे - नन्हे से सपने हैं! उन सबको पूरा करके दिखाऊंगी माँ !   कसम है मुझे तेरी , अपने हाथों की लकीरें खुद बनाऊंगी माँ! स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा नाम मेरा , ऐसा कुछ  कर दिखाऊंगी माँ जो कहते हैं *बेटे बेटियों से बड़कर हैं * उन्हें - बेटी का क्याअस्तित्व है यह साबित करके दिखाऊंगी माँ इसलिए - मुझे भी दुनिया में आने दो ना माँ , बहुत कुछ करके दिखाने दो ना माँ ! आने दो ना माँ !!   -सारिका गाबा