सुखदेव,भगतसिंह,राजगुरु
तेरे बलिदानों पे नाज करूँ-(2)
तूने कौन सी रोटी खायी होगी
पराधीनता पसंद न आयी होगी
जब घर छोड़ने की आयी बारी होगी
तब माँ ने कसम दिलायी होगी
ये सब कैसे भूल के तूने
जान की बाजी लगायी होगी
सुखदेव,भगतसिंह,राजगुरु
तेरे बलिदानों पे नाज करूँ
जब यौवन की दहलीजों पर
सब प्रेमगीत को गाते थे
तब अल्हड़,अक्खड़, वो मस्त-दिवाने
वतन पे मिटने वाले थे
जब फंदे को गले लगाया होगा
मिट्टी को माँ तो बुलाया होगा
ये कहते-कहते झूल गया
मरना भी पड़े तो मिट्टी की ख़ातिर
जीना भी पड़े इस मिट्टी की ख़ातिर
तो मैं (100-200) बार मरूँ
सुखदेव,भगतसिंह,राजगुरु
तेरे बलिदानों पे नाज करूँ.....(सरस)