शीर्षक : समावेश


कवि : शरद अल्फाज़ी


मैं तुम्हारा प्रेममुखी हूँ

जिस दिशा में बहता है तुम्हारा प्रेम

उसी दिशा में निहारता हूँ मैं

और आश्रित हो जाता हूँ

बाकी सभी दिशाओं को भूलकर

शायद इसीलिए आजकल मैं

अपने हृदय की तरफ झांकता हूँ

जरूर ही तुम मेरी कल्पना से बाहर नहीं

मेरे हृदय में समावेश है तुम्हारा ।


~ शरद 'अल्फाज़ी '


#शरदअल्फाज़ी