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बौद्ध


मैं चलूँगा उस पथ परजिसपर

किञ्चित भी न हो प्रतिबद्धताया स्वार्थ का धूम्र

मेरे पथ पर मैं मिलूँ या न मिलूँमेरे पदचिन्ह अवश्य मिलेंगे

— शरद अल्फाज़ी
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