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फलसफा...जिंदगी का !


बड़ी देर तक जलाया है अरमानों को मशालों की तरह,कैसे बदलते है तकदीरों को कोई बता तो दे !

सहमा है मेरा दिल इस दुनिया के रंग से,ए वक़्त तेरे साथ चल सकु कुछ ऐसा फलसफा तो दे !!

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