लक्ष्य दोनों का एक सा है।
रास्ते का फर्क ज़मी और आसमान सा है।।
इधर राजपूत के sophisticated boys हैं,
उधर मॉडल के लड़के हैं।
इधर sports room , football, cricket kit है,
उधर सस्ते bat से चौका मारते खिलाडी हैं ।
इधर canteen के समोसे, पेटिस, संतरे का रस है,
उधर थड़ी की चाय और cigarette के कश हैं ।
इधर Nike और Adidas के shoes की shine है,
उधर टूटी चप्पल में भी मस्ती divine है ।
इधर life Goa के समंदर की ठंडी रेत है,
उधर cactus और थार की गर्म तपती रेत है ।
इधर हैं चमचमाती बेंच, white board , Computer Lab,
उधर है टूटी कुर्सियों के बीच बैठने लायक जगह ढूंढती उम्मीद।
इधर bikes और scooty पर आते लड़के लड़किया हैं,
उधर ग्रीस वाले हाथों से साइकिल की चैन चढ़ाते बच्चे हैं ।
Physical distance कुछ kilometres का ही है,
Cultural distance शायद सदियों का ।
होते दोनों जगह students ही हैं, फर्क इतना है,
इधर पढ़ना है, उधर झूझना ।
कैसे मिटे ये फर्क, समझ नहीं आता,
हज़ारो फैले हुए Dots को मन जोड नहीं पता,
शायद कभी शराब और पेट्रोल की कमाई का कुछ हिस्सा शिक्षा में लगाया जाये ।
शायद तभी कोई सरकारी स्कूल का बच्चा सिर्फ पढाई पर ध्यान दे पाए ।
जय हिन्द
By संयम दवे़
