।। घर घर में जलाओ दीप ।।
घर घर में जलाओ दीप, सिया और राम लखन संग आते हैं ।
सब मंगल गाओ गीत , सिया और राम लखन संग आते हैं ।
चौदह बरस से था अँधियारा , सब सूना था चहुँ ओर;
सबके मन में छाई थी , इक काली घटा घनघोर ।
अब कोना कोना कर दो रोशन , कि भानु स्वयं धरा पर आते हैं ।
फिर कभी ना आये ऐसा क्षण , जब प्रभु हमें छोड़कर जाते हैं ।
यह दिन फिर कभी न आएगा , जब नर नारायण बन जाते हैं ।
घर घर में जलाओ दीप, सिया और राम लखन संग आते हैं ।
हनुमान सा भक्त है पाया , सुग्रीव जैसा मित्र कमाया;
शत्रु भी त्रिलोक विजयी , कर संहार उसे मोक्ष दिलाया ।
खाली हाथ गए थे, नभ सा यश कमाकर लाते हैं ।
देवो के समतुल्य , पुरुषोत्तम राम कहलाते हैं ।
घर घर में जलाओ दीप, सिया और राम लखन संग आते हैं ।
पथ में असंख्य कांटे थे, वो सब कुछ सहते जाते थे;
खुद भूखे प्यासे रह जायें , ऋषियों की सुरक्षा चाहते थे ।
स्वयं संपूर्ण सक्षम थे, पर शबरी के झूठे बेर चखना चाहते थे;
केवट , जटायु, नल और नील को भी, अमर बनाना चाहते थे ।
ऐसे जन मानस के नायक, अब कहाँ जन्म ले पाते हैं ।
घर घर में जलाओ दीप, सिया और राम लखन संग आते हैं ।
अपने अंदर के रावण से, चलो आज लड़ जाएँ हम ;
विजयी होने के लक्ष्य से, स्वयं राम बन जाएँ हम ।
पथ में आएँगी बाधाएँ , यह युद्ध बहुत दुष्कर होगा;
ना हनुमान का साथ,ना ही लक्ष्मण जैसा अनुज होगा ।
जो अपना युद्ध स्वयं लड़े , प्रभु उसके संग चले आते हैं ।
घर घर में जलाओ दीप, सिया और राम लखन संग आते हैं ।
सब मंगल गाओ गीत , सिया और राम लखन संग आते हैं ।
।। जय श्री राम ।।
जय हिन्द
(By - संयम दवे)

