बचपन


मन के Store Room में, किसी कोने में पड़े,

उस बक्से को चलो आज खोलें;

बरसो से जमी धूल मिट्टी को आज हटाएँ,

उन दिनों की स्मृतियाँ फिर से ताज़ा हो जायें ।

चलो, एक बार फिर से वो बचपन जी जायें ।


वो पहला प्यार, पहली बारिश की फुहार,

गर्मी की छुट्टियों में देर तक छत पर सोये रहना,

फिर किसी छुट्टी के दिन देर तक सो जायें

चलो, एक बार फिर से वो बचपन जी जायें


DDLJ के गानों को Full volume में बजाकर,

बेसुरा ही सही, पूरी शिद्दत से गायें ;

खुद को Raj Malhotra समझकर, अपनी बाहें भी फैलाएं

चलो, एक बार फिर से वो बचपन जी जायें


आज के morning walk पर कानो से earpod हटाएँ,

किसी दोस्त के साथ, यूँ ही टहल आये;

वापस आते हुए रामलाल के समोसे भी ले आएं

चलो, एक बार फिर से वो बचपन जी जायें


याद करता होगा या नहीं, पहचानती होगी या नहीं,

धुंधली स्मृतियों को नयी रोशनी से हटाया जाए;

सिर्फ एक Hi से शुरुआत तो की जाए ;

एक कदम जो जाने कब से रोक रखा है, आज उसे बढ़ाए

चलो, एक बार फिर से वो बचपन जी जाएं


अर्से से जो बात मन में है, उसे आज कह दें ,

किसी से माफ़ी मांग ले, किसी को माफ कर दे ,

क्या सब कुछ पहले जैसा हो पायेगा ?

शायद नहीं ।

मगर आज से बेहतर बनाने की कोशिश तो की जाए

चलो, एक बार फिर से वो बचपन जी जाएं

एक बार फिर से वो बचपन जी जाएं


(By - संयम दवे)