दरख्तों ने सोचा कीचल कर देखें वो भी कभीतोड कर कुदरत का उसूलफिर अगले ही पल आया उन्हेंअपने परिंदो और घौसलों का ख्यालऔर फिर उनसे कभीवो हौंसला न हुआ