दरख्तों ने सोचा की 

चल कर देखें वो‌ भी कभी 

तोड कर कुदरत का उसूल 

फिर अगले ही पल आया उन्हें

अपने परिंदो और घौसलों का ख्याल

और फिर उनसे कभी 

वो हौंसला न‌ हुआ 

-संवाद मजबूरी से