कोई भी हर्फ लिखूं नाम तेरा हीं आए
मेरी शाम ढल के रूमानी शब बन जाए
इल्तज़ा यही की तुझे खुश रखूं हमेशा
मैं सूखा दरख़्त और तू बारिश बन जाए
मेरे और तेरे मोहब्बत में फर्क है कुछ
मैं तेरी दुआ और तू मेरा रब बन जाए
मुझे यह नहीं सोचना कि अंजाम क्या होगा
तू साथ चल तो हर सफर मंजिल बन जाए
तेरे बाद ज्यादा नहीं बस कुछ हीं ख्वाहिश हैं
यूंही हंसते रहे तू और जिंदगी ग़ज़ल बन जाए


