अब जुदा हो गए तो लगता है
हमारा मिलना एक ख्वाब था
शायद वो गलतफहमी थी मेरी
जो मुझे लगा तुम्हारा अहसास था
जब रोना ही था मुझे तेरे लिए 
फिर क्यूं तेरी मुस्कुराहट पर ऐतबार था
जब मिलनी ही ना थीं लकीरें हमारी
तो तेरा ज़िंदगी में आना क्या इत्तेफ़ाक था