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दिल में बसे दर्द को दिखाता कौन है 
किसी के खान्धे पर सर राख कर अब रोता कौन है

दिन गुज़रता नहीं था जिनका कभी हमारे बगैर
पूछते  है वो आज सबसे, के ये शख्स कौन है

जितने भी थे दोस्त मेरे, सब खुदगर्ज़ निकले
बड़ा ग़ुरूर था हमे, के मेरा यहाँ दुष्मन कौन है

बरसो बाद आज किसी ने मेरे दर पर दस्तक दि

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