कभी यु ही हमसे मिलने आ जाया करो
हमने कब कहा के तुम जिन्दगी जाया करो 

उम्र यु ही गुजर गयी हमारी तुम्हारे इंतजार मे
कहने लगे है लोग अब थोड़ी ईबादत भी किया करो

जब रिश्तो को सँभालने की जिम्मेदारी बन पढ़े
कभी कभी अपनो के सामने थोड़ा झुक जाया करो

हमने कब तुमपर बंदिशे राखी है मुलाकातो की
छोटा सा जरूर है पर  घर तुम्हारा भी है आया जाया करो 

यु खुद को मजहबो की जंजीरो में बाँधना ठीक नहि
दिल जब चाहे मंदिर तो कभी मस्जिद जाया करो