काश मोहब्बत ऐसी ना होती,
तूफ़ानों का डेरा नहीं होता बस्तियों में,
यूं कश्मकश की ज़िन्दगी कभी ना होती,
तो कभी कोई प्यार का परिंदा बेघर ना होता कभी।
काश मोहब्बत ऐसी ना होती,
तो दिया यूं ना जलना होता अंधेरों में,
बूंद बूंद आंखो से कभी ना गिरती,
तो कभी कोई प्यार के लिए अनजान नहीं होता।

