कश्मकश से भरी ये लंबी रात..
कब तक रहेगी,
आंसू सारे बह गए,
ये आंख में नमी कब तक रहेगी,
सपनें सारे बिखर गए,
ये टूटतीं-जुड़ती उम्मीदें कब तक रहेगी,
उदास सुबह और तन्हा दोपहर,
और ये काटती शाम कब तक रहेगी,
जब भी गिरा हूँ, खुद ही उठा हूँ,
ये मेरी नही हारने वाली हिम्मत कब तक रहेगी,
कश्मकश से भरी ये लंबी रात कब तक रहेगी।


