
आंसू जो पलकों तक आ गयी है,
उसे बह जाने दो,
बात पुरानी है,
तक़लीफ़ देह भी,
उसे जाने दो।
वो नही आयेगा,
ये हक़ीक़त है,
तुम जानते हो,
इसे झूठ बतलाकर ,
क्यूँ खुद को उलझाये जा रहे हो।
छत पर आओ जरा चांद को देखो,
दुनिया खूबसूरत है सांझ को
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