प्रेम नहीं मिला तो उस दिन मैंने पहली बार सोचा कि मेरे पास कुछ हथियार होने चाहिए और एक पेन खरीदकर लाया एक नोटबुक और कुछ किताबें
पेन से पहला खत उसी लड़की के नाम लिखा पहली कविता, पहली कहानी भी बावजूद इसके हार गया और कविता, कहानी, ख़त तीनों को ही एक साथ अपनी ठंडी आह से जला देना चाहा प्रेम विद्रोह भी हो सकता है और क्रान्ति भी पर हर क्रान्ति को पहले विद्रोह बनना पड़ता है विज्ञान संकाय का होने के बावजूद इस बात को मैं अच्छी तरह से जानता था धीरे धीरे लड़ाई युद्ध में बदलती गई प्रेम ने भूगोल भी लिखा इतिहास भी गणित भी समझा, अर्थशास्त्र भी और वह हथियार एक दिन जाने कैसे प्रेम बन गया इस तरह उस दिन मैंने दूसरा खत लिखा दूसरी कविता, दूसरी कहानी लिखी उस दूसरी लड़की के लिए जिसका मिलना अभी बाकि है और उस तक पहुंचने के लिये मैं एक और बड़ी जंग की तैयारी में हूं।