तुम मीत मेरे, तुम प्रीत मेरे,
तुम काव्य, गज़ल, संगीत मेरे।
मौसम की बदलती ऋतुओं सी,
तुम ग्रीष्म मेरे, तुम शीत मेरे।
तुम संग ही जीना मरना है,
तुम जीवन की हर रीत मेरे।
इस प्रेम का सब सार तुम्हीं,
तुम हार मेरी, तुम जीत मेरे।
तुमको ही अर्पण हैं सारे,
जितने भी लिखे ये गीत मेरे।
-संजू


