तस्वीर तेरी ये कितनी हसीं है,
पर इसमें शायद कुछ कमी है।
हंस तो रही है तू भीड़ में लेकिन,
आँखों में तेरी क्यों ये नमी है।
जिस मोड़ पर तू गया छोड़ कर,
जिंदगी अब तक वहीं थमी है।
मुसाफिर हूँ मेरा यहाँ कुछ नहीं,
ये आसमां तेरा है, तेरी जमीं है।
तेरी पलकें मुझसे ये कह रही हैं,
बिछड़ के तू भी तो खुश नहीं है।
मैं बेवफा तो नहीं था मगर,
तू कह रहा है तो फिर सही है।
-संजू


