अक्सर ऐसा होता है,
कि तेरा ख्याल आते ही,
मुस्कुराने लगते हैं,
होंठ स्वयं से,
बन्द हो जाती हैं,
खुद ब खुद पलकें।
छाने लगता है,
सुरूर बदन में,
और गुनगुनाने लगती हैं,
धड़कनें प्रेम गीत।
कभी यूँ भी होता है,
कि तेरा ख्याल मुझे,
ले जाता है,
दूर दुनिया से,
किसी स्वप्निल संसार में,
जहाँ कोई किसी से,
बिछुड़ता नहीं,
चलती है जहाँ,
मात्र मिलन रीत।
और कभी यूँ भी होता है,
कि तेरे ख्याल के साथ,
आ जाती है,
उम्मीद कि रौशनी भी,
और कर जाती है उजाला,
मेरे सूने जीवन में,
जिसमें दिखने,
लगता है मुझको,
हमारा वो अतीत।
और कभी कभी,
तेरे ख्याल के साथ,
आ जाते हैं,
कुछ अश्क़ भी,
बिन बुलाये चुपके से,
सरक जाते हैं,
कपोलों पे,
ओंस की गीली,
बूँद जैसे,
उनकी सिहरन से,
बज उठता है,
मन में कोई,
मधुर संगीत।
◆संजू◆


