मैं जब खुश होता हूँ,

कुछ लिखता हूँ,

और जब दुखी होता हूँ,

तब भी लिखता हूँ।

सुख और दुख,

मेरी चल संपत्ति है,

जबकि लिखना अचल।


-संजू