दिखने में नाज़ुक मगर संगदिल है ये रोटी।
हर एक दंगे फसाद में शामिल है ये रोटी।
हमने देखा है इसके लिए लड़ते सभी को,
बेबस बेगुनाहों की कातिल है ये रोटी।
रोटी अमीर और गरीब का भेद जानती है,
बदनसीबों को कहाँ हासिल है ये रोटी।
चाँद सूरज जैसी है तासीर इसकी,
सबकी भूख मिटाती है जाहिल है ये रोटी।
इसके भी कई धर्म हैं आदमी की तरह,
गीता, ग्रन्थ, कुरान और बाइबिल है ये रोटी।
-संजू
