मैं तुम्हें,

इतना लिखना चाहता हूँ,

कि खत्म हो जायें,

सभी शब्दावलियां,

न बचे कोई व्यंजन,

न व्याकरण,

न बारहखड़ी कोई।


और तुम्हें,

लिखने के लिये,

मुझे रचनी पड़े,

नयी लिपि कोई।


-संजू