दरख्तों से टूटने वाले पत्ते,
पहले खुद को सुखाते हैं,
फिर शाख से गिर जाते हैं।
आसमां से टूटता हुआ तारा,
पहले खूब टिमटिमाता है,
फिर ओझल हो जाता है।
तुम्हें मुझसे दूर जाना हो,
तो बन जाना कोई पत्ता या तारा,
ताकि मैं इशारा समझ सकूं तुम्हारा।
-संजू


दरख्तों से टूटने वाले पत्ते,
पहले खुद को सुखाते हैं,
फिर शाख से गिर जाते हैं।
आसमां से टूटता हुआ तारा,
पहले खूब टिमटिमाता है,
फिर ओझल हो जाता है।
तुम्हें मुझसे दूर जाना हो,
तो बन जाना कोई पत्ता या तारा,
ताकि मैं इशारा समझ सकूं तुम्हारा।
-संजू