उदासी भरी ये शाम ढल जाये तो अच्छा हो,

स्पंदन स्मृतियों का टल जाये तो अच्छा हो,


मैं नहीं चाहता मेरे बाद कोई पढ़े तुझे,

मेरे साथ मेरी कविताएं भी जल जायें तो अच्छा हो।


-संजू