
किसी सुहागन के माथे की बिंदी लगती है,
सबसे प्यारी भाषा मुझे हिन्दी लगती है।
बारहखड़ी की चादर ओढ़े शांत ककहरों सी,
स्वरों और व्यंजनों की बहुरंगी लहरों सी,
अविरल, शीतल बहती हुई कालिंदी लगती है,
सबसे प्यारी भाषा मुझ
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किसी सुहागन के माथे की बिंदी लगती है,
सबसे प्यारी भाषा मुझे हिन्दी लगती है।
बारहखड़ी की चादर ओढ़े शांत ककहरों सी,
स्वरों और व्यंजनों की बहुरंगी लहरों सी,
अविरल, शीतल बहती हुई कालिंदी लगती है,
सबसे प्यारी भाषा मुझ