किसी सुहागन के माथे की बिंदी लगती है,
सबसे प्यारी भाषा मुझे हिन्दी लगती है।
बारहखड़ी की चादर ओढ़े शांत ककहरों सी,
स्वरों और व्यंजनों की बहुरंगी लहरों सी,
अविरल, शीतल बहती हुई कालिंदी लगती है,
सबसे प्यारी भाषा मुझे हिन्दी लगती है।
हिन्दी महज एक प्रांत नहीं देश की भाषा है,
हर एक जुबां पर हो हिन्दी यही अभिलाषा है,
कभी मलयाली, कभी असमिया, कभी सिंधी लगती है,
सबसे प्यारी भाषा मुझे हिन्दी लगती है।
-संजू


